Tushar Bhand

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आदत को बदलो 06-Apr-2023

                     आदत को बदलो


रीढ़ को सीधा करो, आँख से देखा करो
सुनने की आदत को बदलो, मुँह से कुछ बोला करो। 

रीढ़ को सीधा करो, आँख से देखा करो
सुनने  की आदत को बदलो, मुँह से कुछ बोला करो सब तुम्हारे  बस मेंं है , सब हमारी हद में है 
कुछ नहीं जो कल में है, जिंदगी पल-पल में है उजले दिन की चाह में , आज ना मैला करो 
रीढ़ को सीधा करो, आँँख से देखा करो
 सुनने की आदत को बदलो, मुंह से कुछ बोला करो।

हर तरफ दीवार है, मुश्किलें -ही -मुश्किलें 
अपने हिस्से आई है, बस कोशिश-ही-कोशिश 
जिस तरफ नजरें घुमाओ, साजिशें-ही-साजिशें दफन हैं हमारे अंदर, ख्वाहिशें- ही- ख्वाहिशें 
हक ना झोली में गिरेगा , माद्दा पैदा करो 
रीढ़ को सीधा करो, आँख से देखा करो
 सुनने की आदत को बदलो, मुँह से कुछ बोला करो। 


                             

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4 Comments

Gunjan Kamal

09-Apr-2023 08:47 PM

बहुत खूब

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खूबसूरत भाव और संदेश देती हुई कविता

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Reena yadav

06-Apr-2023 08:45 PM

👍👍

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